Saturday, March 28, 2009

जाने क्यूँ......

ना जाने क्या सोच रहा था मैं,
किस धुन में चला जा रहा था मैं।
अपनी ही दुनिया में मस्त था,
ना ज़माने कि परवाह थी,ना किसी की फिकर।
लगी ठोकर, गिरा मैं,
सँभालने कोई ना आया।
अँधेरी गलियों में, अनजान राहों में,
गिरता ही चला गया मैं।
जब तक ख़ुद संभालता,बहुत देर हो चुकी थी,
दुनिया बदल गई,ख्वाब टूट गए,
सचाई से सामना हुआ मेरा।
लगा अब ना रास्ते है ना मंजिल।
किसी भी तरह,नियति से लड़ता हुआ,
अपनी जिंदगी जी रहा हूँ,
हर रोज एक नया ज़हर पी रहा हूँ।
बस एक विनती करना चाहता हूँ आपसे,
कि मेरी तरह कभी ये नादानी करना,
कभी किसी को अपना दिल ना देना,
दोस्तों,कि जो तुमने ये भूल,
तो फ़िर उसकी याद में पीते ना रहना। :) :) :)

decicated to all my friends

2 comments:

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  2. hmmm...i sat for 10 ten minutes staring d screen thing what to comment...
    m still blank..bcz its simply awesome...

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